10: प्रबंधन में स्टाफ़िंग (Staffing in Management)
प्रक्रिया,
उद्देश्य, और मानव संसाधन विकास
स्टाफ़िंग (Staffing) प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है,
जो संगठन में मानव संसाधनों (Human
Resources) की उपलब्धता,
विकास,
उपयोग और बनाए रखने पर
केंद्रित होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपयुक्त संख्या में,
उपयुक्त कौशल वाले लोग उपयुक्त
स्थान और समय पर हों, ताकि
संगठन के लक्ष्य प्रभावी रूप से प्राप्त किए जा सकें।
सरल शब्दों में, स्टाफ़िंग को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है:
"संगठन की
आवश्यकताओं के अनुसार मानव संसाधनों की योजना प्राप्ति प्रशिक्षण,
नियुक्ति और विकास की
प्रक्रिया।"
जॉर्ज आर. टैरी (George
R. Terry) के
अनुसार:
"स्टाफ़िंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो संतोषजनक और
संतुष्ट कार्यबल प्राप्त करने और बनाए रखने से संबंधित होती है।"
यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्टाफ़िंग केवल कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसमें प्रशिक्षण, विकास, प्रेरणा, प्रदर्शन प्रबंधन (Performance Management), पदोन्नति कर्मचारी कल्याण, और सेवानिवृत्ति के बाद का सहयोग भी शामिल होता है।
स्टाफ़िंग के उद्देश्य (Objectives of Staffing)
प्रबंधन में स्टाफ़िंग के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. पर्याप्त जनशक्ति
सुनिश्चित करना – संगठन
की वर्तमान और भविष्य की मानव संसाधन आवश्यकताओं को पूरा करना।
2. गुणवत्ता युक्त कार्यबल
चुनना – योग्यताओं,
अनुभव और दृष्टिकोण के आधार पर
उपयुक्त व्यक्तियों का चयन करना।
3. मानव संसाधनों का उपयोग
– मानवीय क्षमताओं का सर्वोत्तम
उपयोग सुनिश्चित करना।
4. कर्मचारी विकास
– प्रशिक्षण और विकास
कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत और व्यावसायिक वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
5. प्रतिधारण और संतुष्टि
– कर्मचारियों को प्रेरणा,
कल्याण और उन्नति के अवसरों के
माध्यम से बनाए रखना।
स्टाफ़िंग की प्रक्रिया (Staffing Process)
स्टाफ़िंग एक व्यवस्थित और सतत प्रक्रिया है,
जो निम्नलिखित चरणों में
संपन्न होती है:
1.
मानवशक्ति योजना (Manpower
Planning)
संगठन के लक्ष्यों, विस्तार योजनाओं और सेवानिवृत्ति को ध्यान में रखते हुए,
भविष्य में आवश्यक कर्मचारियों
की संख्या और प्रकार निर्धारित करना। इसमें कार्यभार विश्लेषण (Workload
Analysis) और कार्यबल विश्लेषण (Workforce
Analysis) शामिल होता है।
2.
भर्ती (Recruitment)
यह प्रक्रिया संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने और उन्हें
नौकरी के लिए आवेदन हेतु प्रोत्साहित करने की होती है। स्रोत आंतरिक (Internal)
और बाहरी (External)
दोनों हो सकते हैं।
उदाहरण: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा विभिन्न पदों के लिए भर्ती अभियान चलाना।
3.
चयन (Selection)
लिखित परीक्षा, साक्षात्कार, चिकित्सा परीक्षण आदि के माध्यम से आवेदकों की स्क्रीनिंग
और मूल्यांकन कर उपयुक्त उम्मीदवार का चयन करना। यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के
अनुसार सबसे उपयुक्त व्यक्ति चुना जाए।
4.
परिचय और प्रारंभिक प्रशिक्षण
(Orientation and Initial Training)
नई भर्ती किए गए कर्मचारियों को संगठन की दृष्टि (Vision),
मिशन (Mission),
मूल्य (Values),
नियमों और मानक
कार्यप्रणालियों से परिचित कराने हेतु प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
यह प्रशिक्षण समर्पित प्रशिक्षण संस्थानों या कार्यस्थल पर
ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण के रूप में हो सकता है।
5.
कार्यस्थल पर नियुक्ति (Job
Placement)
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद, कर्मचारियों की योग्यता, प्रदर्शन और कौशल के अनुसार उन्हें उपयुक्त पद पर नियुक्त
किया जाता है।
सही कर्मचारी को सही कार्य सौंपने के लिए कार्य विश्लेषण (Job
Analysis) सहायक होता है।
6.
प्रदर्शन मूल्यांकन और
पदोन्नति (Performance Appraisal and Promotion)
समय-समय पर कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर उनकी
क्षमताओं, कमजोरियों
और संभावनाओं को पहचाना जाता है। प्रदर्शन, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाती है।
यह न केवल कर्मचारियों को प्रेरित करता है,
बल्कि उत्तराधिकार योजना (Succession
Planning) में भी सहायक होता है।
7.
पुनः प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन
(Retraining and Skill Upgradation)
नई तकनीकों या उद्योग मानकों में परिवर्तन के अनुसार,
कर्मचारियों को पुनः
प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे अद्यतित और सक्षम बने रहें। सतत अधिगम (Continuous
Learning) एक उत्पादक और लचीले
कार्यबल को बनाए रखता है।
8.
मानव संसाधन विकास (Human
Resource Development - HRD)
HRD
का उद्देश्य दीर्घकालिक
कर्मचारी विकास होता है, जिसमें
नेतृत्व विकास (Leadership Development), करियर योजना (Career Planning), मार्गदर्शन (Mentoring), टीम निर्माण (Team Building), और व्यक्तित्व विकास (Personality
Enhancement) जैसे कार्यक्रम शामिल
होते हैं।
यह संगठन में भविष्य के
नेतृत्व को तैयार करने और व्यक्तिगत विकास को संगठनात्मक विकास से जोड़ने में
सहायक होता है।
9.
कर्मचारी कल्याण गतिविधियाँ (Employee
Welfare Activities)
संगठन कर्मचारियों की संतुष्टि,
मनोबल और वफादारी बढ़ाने के
लिए विभिन्न कल्याण योजनाएँ लागू करते हैं, जैसे:
- आवास
सहायता
- चिकित्सा
सुविधाएँ
- परिवहन
सेवाएँ
- सब्सिडी
युक्त कैंटीन
- मनोरंजन
सुविधाएँ
- वेतन
सहित छुट्टियाँ
- पारिवारिक
सहायता योजनाएँ
ये सभी पहल कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life
Balance) को बेहतर बनाते हैं और
मजबूत नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित करते हैं।
10.
शिकायत निवारण और विवाद समाधान
(Grievance Redressal and Conflict Resolution)
कर्मचारियों की शिकायतों, अनुशासनात्मक मामलों और विवादों को हल करने के लिए एक
संरचित व्यवस्था आवश्यक होती है।
उदाहरण:
- स्थायी
वार्ता तंत्र (Permanent Negotiation Machinery - PNM)
- वार्षिक
आम बैठकें (Annual General Meetings - AGM)
- यूनियन
वार्ताएँ
ये सभी संगठनात्मक सामंजस्य बनाए रखने और कर्मचारियों की
समस्याओं को हल करने में सहायक होते हैं।
11.
सेवानिवृत्ति के बाद लाभ (Post-Retirement
Benefits)
सेवानिवृत्ति के बाद भी संगठन अपने कर्मचारियों को वित्तीय
और चिकित्सा सहायता प्रदान करता है। इन लाभों में शामिल हैं:
- पेंशन
- ग्रेच्युटी
- भविष्य
निधि (Provident Fund)
- चिकित्सा
प्रतिपूर्ति
- सहायता
डेस्क और पेंशन अदालतें (Pension Courts)
ये योजनाएँ संगठन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती
हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
स्टाफ़िंग केवल नए कर्मचारियों की भर्ती तक सीमित एक बार की
गतिविधि नहीं है, बल्कि
यह एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है जो किसी कर्मचारी के पूरे जीवन चक्र – भर्ती से
लेकर सेवानिवृत्ति और उसके बाद तक – को समाहित करती है।
एक प्रभावी स्टाफ़िंग प्रणाली वही होती है जो मानव संसाधनों
को संगठन की सबसे मूल्यवान पूंजी मानती है। यदि इसे पारदर्शिता,
निष्पक्षता और सहानुभूति के
साथ लागू किया जाए, तो यह
एक प्रेरित कार्यबल तैयार करती है, संगठनात्मक संस्कृति को सुदृढ़ करती है और उत्पादकता को
बढ़ाती है।
आज के जटिल और प्रतिस्पर्धी युग में वे संगठन ही सफल होते
हैं जो केवल तकनीक या अधोसंरचना में नहीं, बल्कि लोगों में निवेश करते हैं।
एक मजबूत स्टाफ़िंग प्रणाली
सतत विकास, नवाचार
और कर्मचारी संतुष्टि की रीढ़ होती है।
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